हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कोटियूर वह पवित्र स्थान है जहां राजा दक्ष ने यज्ञ किया था और जहां माता सती ने आत्मदाह किया था। इसी वजह से इस मंदिर को ‘दक्षिण काशी’ के नाम से भी जाना जाता है। घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक महत्ता और अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है।
मूसलाधार बारिश और कठिन रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही है। भक्त कई घंटों तक कतार में खड़े होकर भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर का शांत वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा उन्हें बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करती है।
सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस मंदिर की लोकप्रियता बढ़ी है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें इस पवित्र स्थल के बारे में फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए जानकारी मिली, जिसके बाद वे यहां दर्शन के लिए पहुंचे।
प्राचीन परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित होने वाला कोटियूर का वैशाख महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान कर रहा है।
Author: JAN TV Editorial Team
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