अक्षय तृतीया के दिन शुरू हुए रथ निर्माण कार्य ने अब महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। रथों के पहियों का निर्माण पूरा हो चुका है और अब मुख्य ढांचे तथा आधार को मजबूत करने का कार्य तेजी से चल रहा है। कारीगर लोहे की कीलों और पारंपरिक तकनीकों की मदद से रथों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
रथ निर्माण केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ा अनुष्ठान भी है। बढ़ई, लोहार और सेवक मिलकर सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए इन विशाल रथों को आकार दे रहे हैं।
सेवकों का कहना है कि वे भगवान जगन्नाथ की कृपा से इस पवित्र कार्य में भाग लेते हैं और इसे सेवा का अवसर मानते हैं। रथ निर्माण के दौरान कई पारंपरिक रस्में भी निभाई जाती हैं, जो इस आयोजन को और अधिक विशेष बनाती हैं।
16 जुलाई को आयोजित होने वाली रथयात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में रथ निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सभी संबंधित समूह दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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