यूपीटीईएन के जरिए प्रदेश की बिखरी ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को एक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना के तहत 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तर की इकाइयां शामिल होंगी। इसका मकसद मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार नजदीकी और सक्षम चिकित्सा केंद्र तक तेजी से पहुंचाना है।
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष के अनुसार इस व्यवस्था के जरिए हर साल 10 हजार से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। समय पर इलाज मिलने से गंभीर दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और स्थायी विकलांगता के मामलों में कमी लाने की कोशिश होगी। इसके लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय अस्पताल, एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और कमांड सेंटर को एक ही आपात नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
यूपीटीईएन का उद्देश्य मरीज के अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय आपातकाल की सूचना मिलते ही इलाज की प्रक्रिया शुरू करना है। योजना के तहत 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट यानी एएलएस एंबुलेंस को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस को केवल मरीजों के परिवहन का साधन न मानकर चलते-फिरते आपात उपचार केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाएगा। प्रदेश के 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर भी नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनके जरिए इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस, अस्पतालों में बेड और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
योजना के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। अस्पताल पहुंचने से पहले महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णय लेने के लिए करीब 10 मिनट का अतिरिक्त समय हासिल करने की भी योजना है। इसके लिए रियल-टाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई आधारित ट्रायेज जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का प्रस्ताव है, ताकि तय किया जा सके कि किस मरीज को किस अस्पताल या विशेषज्ञ विभाग में भेजना है। पूरी व्यवस्था ‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम’ के सिद्धांत पर संचालित करने की दिशा में तैयार की जा रही है।
योजना में आम लोगों को भी आपातकालीन व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क तैयार करने की योजना है। पहले स्तर पर पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसे तत्काल मदद पहुंचाने वाले लोग होंगे। दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत रिस्पॉन्डर शामिल होंगे। तीसरे स्तर पर आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस का प्रशिक्षण देकर जरूरत के समय शुरुआती मदद के लिए तैयार किया जाएगा।
यूपीटीईएन योजना के तहत सभी नागरिकों के लिए 48 घंटे तक मुफ्त आपातकालीन उपचार की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार पर तत्काल इलाज के खर्च का दबाव कम करना है, ताकि आर्थिक कारणों से उपचार में देरी न हो। इसके साथ ही यूपीटीईएन के लिए अलग बजट, मानव संसाधन नीति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
योजना में इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर यानी ईएमओ कैडर बनाने, एम्स के अनुरूप वेतनमान और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था जैसे कदम भी शामिल हैं। इस एकीकृत नेटवर्क के जरिए सरकार का लक्ष्य प्रदेश में गंभीर आपात स्थितियों के दौरान मरीजों को तेजी से सही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और हर साल हजारों लोगों की जान बचाना है।
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