इस घोषणा के बाद ये लोग और यह कंपनी भविष्य में बैंक से ऋण के पात्र नहीं होंगे। उन्हें निदेशक के पद से भी हाथ धोना पड़ेगा। जरूरत पड़ने पर इनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है। नारंग ने कहा कि जीआरसी के इस निर्णय से वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी को अवगत कराया जाएगा ताकि वे इस सूचना पर आगे कोई भी उचित कार्रवाई कर सकें। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंड पीठ ने इस बैंक को पिछले सप्ताह इस मामले में इस कंपनी और इसके जिम्मेदार व्यक्तियों को ऋण जानबूझ कर न चुकाने वाला घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने की छूट दे दी थी। उसके बाद बैंक की जीआरसी की आज बैठक हुई। जीआरसी ने इससे पहले निदेशकों को पेश होने के लिए कहा था लेकिन वे नहीं आए। बदले में उन्होंने अपने वकील के जरिए एक पत्र भेजा कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है और उस पर फैसला न होने तक यह बैंक इस संबंध में आगे कार्रवाई नहीं कर सकता है।
Author: Shiv Kishor
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