यह फैसला Narendra Modi और Lee Jae-myung के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद लिया गया। बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक तनाव और व्यापारिक चुनौतियों के इस दौर में भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं।
दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए साथ काम करने का संकल्प भी दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ली की यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों को “भविष्योन्मुखी साझेदारी” में बदला जाएगा, जिससे सहयोग के नए आयाम खुलेंगे।
साल 2010 में लागू हुए CEPA के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अब इस समझौते को अपग्रेड कर चिप्स, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने की योजना है।
वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहन देने और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह पहल न केवल द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देगी, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक सहयोग को भी मजबूती प्रदान करेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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