सेना के अधिकारियों के मुताबिक, सूचना मिलते ही सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज़ और सुनियोजित तैनाती की गई, जिससे मजबूत रक्षा घेरा तैयार करने के साथ-साथ आक्रामक क्षमता भी बरकरार रखी गई। इसके तहत Rann of Kutch और आसपास के इलाकों में हालिया सैन्य अभ्यासों ने भी सेना की तैयारियों को दर्शाया।
ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ा खतरा दुश्मन के ड्रोन हमले थे। अधिकारियों ने बताया कि बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली, एयर डिफेंस यूनिट्स और आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक के जरिए इन खतरों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया। सेना, वायुसेना, बीएसएफ, कोस्ट गार्ड और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल ने इस अभियान को मजबूत बनाया।
सेना के जवानों ने बताया कि कठिन परिस्थितियों और भीषण गर्मी के बावजूद वे पूरी तरह सतर्क रहे। कई मौकों पर दुश्मन के ड्रोन को समय रहते मार गिराया गया, जिससे संभावित नुकसान को टाला जा सका।
अधिकारियों के अनुसार, आधुनिक तकनीक और विशेष ड्रोन प्रशिक्षण ने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई। ड्रोन के जरिए दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना और सटीक जानकारी जुटाना आसान हुआ, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी।
सेना का कहना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की आधुनिक युद्ध तैयारी, तकनीकी क्षमता और मजबूत समन्वय का उदाहरण है।
Author: JAN TV Editorial Team
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