सुकमा का तुंगल बना इको-टूरिज्म हब, नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नई शुरुआत
(CHHATTISGARH, India) छत्तीसगढ़ के Sukma जिले में स्थित Tungal आज एक उभरते हुए इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। कभी जहां यह इलाका नक्सल गतिविधियों के कारण संवेदनशील माना जाता था, वहीं अब यह बदलाव और विकास की नई कहानी लिख रहा है।

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से जनजातीय समाज आत्मनिर्भर बन रहा है और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पर्यटन और संस्कृति के माध्यम से लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

तुंगल नेचर कैफे इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है, जहां 10 महिलाओं ने मिलकर अपने जीवन को नया आकार दिया है। इनमें कुछ महिलाएं पहले नक्सल गतिविधियों से जुड़ी थीं, जबकि कुछ ने हिंसा का दर्द झेला है। अब ये सभी महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर आजीविका कमा रही हैं।

Forest Department Chhattisgarh और प्रशासन की पहल से यह क्षेत्र पर्यटन के रूप में विकसित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, तुंगल को एक सफल इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

Akshay Dinkar Bhosale ने बताया कि तुंगल बांध को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का विचार सफल रहा है और कुछ ही महीनों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

P Sundarrajan ने कहा कि इस पहल से स्थानीय लोगों की आय बढ़ी है और उन्हें बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

कैफे में काम कर रही महिलाएं प्रशिक्षण लेकर अब आत्मविश्वास के साथ काम कर रही हैं और नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है।

तुंगल आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बदलाव, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।

Author: JAN TV Editorial Team

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