रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के बावजूद ईंधन दरें स्थिर रहने से कंपनियों की कमाई, यानी ईबीआईटीडीए, में गिरावट आ सकती है। साथ ही, बढ़ती लागत के कारण नकदी प्रवाह भी प्रभावित होगा।
फिच का कहना है कि ज्यादा भंडारण और रिफाइनिंग की वजह से कंपनियों की कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ेगी, जिससे फ्री कैश फ्लो पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से ज्यादा, लंबे समय तक ऊंचे दाम बने रहना कंपनियों के लिए बड़ा जोखिम है।
Indian Oil Corporation का विविधीकृत कारोबार उसे अपेक्षाकृत मजबूत बनाता है, जबकि Bharat Petroleum Corporation Limited पर विस्तार और ऊर्जा बदलाव से जुड़े खर्च का दबाव ज्यादा रह सकता है। वहीं, Hindustan Petroleum Corporation Limited की स्थिति संयुक्त परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बेहतर हो सकती है।
फिच के अनुसार, यदि 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो रिफाइनिंग आधारित कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, जबकि खुदरा ईंधन कीमत नियंत्रण से प्रभावित कंपनियां दबाव में रहेंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सरकारी नीतियां और मूल्य नियंत्रण तंत्र कंपनियों की रेटिंग पर अहम असर डालते रहेंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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