अजिता द्वारा विकसित दो खास किस्मों — ‘मयूरी’ और ‘पनिनीर’ — को हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निकाय Protection of Plant Varieties and Farmers' Rights Authority ने बौद्धिक संपदा के तहत मान्यता दी है।
अजिता ने वर्षों तक अलग-अलग कंदों और पराग किस्मों पर प्रयोग कर इन नई प्रजातियों को तैयार किया। उनके बगीचे में फिलहाल फूलों की 75 किस्में मौजूद हैं, जिनमें 15 अनूठी किस्में खुद उन्होंने विकसित की हैं।
अजिता का कहना है कि ये कमल की प्रजातियां छोटे गमलों और छोटे तालाबों के लिए बेहद उपयुक्त हैं और लोगों के लिए आय का अच्छा साधन भी बन सकती हैं।
सीमित जगह होने के बावजूद उन्होंने अपनी छत पर घरेलू फलों और रसोई के पौधों का छोटा बगीचा भी तैयार किया है।
कमल की किस्मों को मिली राष्ट्रीय पहचान ने अजिता को बागवानी के अपने जुनून को और आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी है। अब वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को कमल की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहती हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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