अपर सिविल जज दीपक नाथ सरस्वती ने बुधवार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 226 के तहत यह याचिका खारिज करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में समन करना एक गंभीर विषय है और आपराधिक कानून को सामान्य रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को किसी को समन करने से पहले अपने “न्यायिक विवेक” का उपयोग करना चाहिए।
यह मामला वर्ष 2020 के हाथरस कांड से जुड़ा है, जिसमें एक दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप के बाद उसकी मौत हो गई थी। बाद में ट्रायल के दौरान चार लोगों को बरी कर दिया गया था।
बताया गया कि 2024 में बुलगढी गांव में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने टिप्पणी की थी कि “आरोपी खुले घूम रहे हैं जबकि पीड़ित परिवार घर में बंद है”, जिसे लेकर यह मानहानि शिकायत दर्ज की गई थी।
Author: JAN TV Editorial Team
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