एआईओसीडी का दावा है कि वह देशभर के करीब 12.4 लाख दवा विक्रेताओं, फार्मासिस्टों और वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां कथित तौर पर अवैध तरीके से काम कर रही हैं और भारी छूट देकर पारंपरिक मेडिकल स्टोर कारोबार को प्रभावित कर रही हैं।
एआईओसीडी के महासचिव Rajiv Singhal ने कहा कि देशभर में अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं और राज्य इकाइयों से हड़ताल में व्यापक भागीदारी की जानकारी मिली है। हालांकि, अस्पतालों के भीतर संचालित नर्सिंग होम फार्मेसियों को इस हड़ताल से अलग रखा गया।
वहीं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कुछ संगठित दवा श्रृंखलाओं की दुकानें खुली नजर आईं। एक सेल्स एग्जीक्यूटिव ने बताया कि उनकी कंपनी इस हड़ताल का हिस्सा नहीं है।
एआईओसीडी ने जीएसआर 817 और जीएसआर 220 अधिसूचनाओं का भी विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इन नियमों से ऑनलाइन दवा विक्रेताओं को बढ़ावा मिल रहा है और बिना उचित भौतिक सत्यापन के दवाओं की बिक्री की जा रही है, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
संगठन ने कहा कि एक-दिवसीय हड़ताल के बाद वह आगे की रणनीति पर विचार करेगा ताकि अपने सदस्यों के हितों की रक्षा की जा सके।
Author: JAN TV Editorial Team
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