S&P ने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें घरेलू ईंधन कीमतों और कच्चे माल की लागत के बीच अंतर को और बढ़ा सकती हैं, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर हो सकती है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जो अपनी घरेलू मांग के लिए भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों पर पड़ता है।
S&P ने कहा कि इंडियन ऑयल को ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने और लाभ बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है, जो एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है।
हालांकि एजेंसी ने यह भी कहा कि कंपनी के मजबूत बैंकिंग संबंध, फंडिंग तक पहुंच और सरकार की संभावित सहायता उसकी अल्पकालिक वित्तीय स्थिरता को सहारा दे सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल ने वित्त वर्ष 2025-26 में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें मजबूत ईंधन मांग, बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और वर्किंग कैपिटल गेन शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो तेल बाजार और ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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