15 मई से अब तक ईंधन की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि बार-बार हो रही कीमतों में बढ़ोतरी से खर्चों की योजना बनाना मुश्किल हो गया है। कई यात्रियों और वाहन चालकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों को झेलना कठिन होता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल इसका प्रमुख कारण है। फरवरी के अंत से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं। अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में दबाव बढ़ा है।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ महीनों तक तेल कंपनियों ने बढ़ती लागत के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया है कि राज्य चुनावों के बाद कीमतों में संशोधन किया गया।
लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन कीमतों में हो रही वृद्धि ने परिवहन और रोजमर्रा के खर्चों को और प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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