खोमन ने ओबीसी पुरुष वर्ग में 73वीं रैंक प्राप्त की और इस वर्ष छत्तीसगढ़ से परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले एकमात्र पुरुष उम्मीदवार बने हैं।
कम उम्र में पिता को खोने के बाद खोमन के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। परिवार का सहारा बनने के लिए उन्हें खेतों में काम करना पड़ा, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। बताया जा रहा है कि खेती के काम के साथ-साथ वे रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे।
एम्स नॉरसेट परीक्षा को देश की सबसे कठिन मेडिकल भर्ती परीक्षाओं में माना जाता है। इसमें एमबीबीएस स्तर के प्रश्न पूछे जाते हैं और प्रतियोगिता बेहद कठिन होती है।
खोमन की इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और राज्य को गौरवान्वित किया है। उनकी कहानी संघर्ष, समर्पण और मेहनत से सफलता पाने की प्रेरणा देती है।
अब खोमन देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक में नर्सिंग अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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