मित्र देशों की सेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान भारतीय सेना के K9 दस्तों ने विस्फोटक पहचान, खोजबीन और हस्तक्षेप अभियानों में अपनी विशेष दक्षता दिखाई। अधिकारियों ने कहा कि इन क्षमताओं ने उच्च जोखिम वाले युद्ध क्षेत्रों और बहुराष्ट्रीय अभियानों में उनकी अहमियत को साबित किया है।
अभ्यास में बेल्जियन मैलिनोइस नस्ल के हमलावर कुत्ते ‘एलन’, स्वदेशी नस्ल के ‘रामपुर हाउंड’ खोजी कुत्ते ‘विक्टर’ और विस्फोटक पहचान में प्रशिक्षित लैब्राडोर ‘डेओ’ ने विशेष प्रदर्शन किया। सेना के अनुसार, इन सभी कुत्तों ने भारतीय सेना की K9 यूनिट के अनुशासन, कौशल और मिशन तत्परता का परिचय दिया।
अधिकारियों ने बताया कि स्वदेशी ‘रामपुर हाउंड’ नस्ल की भागीदारी ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह नस्ल कठिन जलवायु में अनुकूलन, सहनशक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है तथा रेगिस्तान से लेकर ग्लेशियर तक विभिन्न इलाकों में प्रभावी साबित हो रही है।
अभ्यास का एक और बड़ा आकर्षण रोबोटिक कुत्तों की मौजूदगी रही। अधिकारियों के मुताबिक, इन रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स ने भविष्य के युद्ध अभियानों में तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के बेहतर तालमेल की झलक पेश की।
अधिकारियों के अनुसार, अभ्यास ‘प्रगति 2026’ में 12 देशों के 400 से अधिक सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का उद्देश्य आपसी समन्वय, सामरिक समझ और युद्ध तैयारी को मजबूत करना है।
Author: JAN TV Editorial Team
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