अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने सामाजिक कार्यकर्ता Harsh Mander द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया। यह याचिका मजिस्ट्रेट अदालत के 20 अप्रैल के उस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिसमें बीजेपी नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था।
अदालत ने 26 मई के अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने गृह मंत्रालय की ओर से जारी शून्य प्राथमिकी और ई-प्राथमिकी से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का हवाला दिया है। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए 15 जुलाई 2026 तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
मामला असम के तिनसुकिया जिले के डिगबोई में 27 जनवरी को आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, हिमंता बिस्वा सरमा ने कथित तौर पर कहा था कि असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान “चार से पांच लाख मिया मतदाताओं” के नाम हटाए जाएंगे।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री ने ‘मिया’ समुदाय के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी की। असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए ‘मिया’ शब्द को अपमानजनक माना जाता है और अक्सर उन्हें बाहरी या बांग्लादेशी कहकर संबोधित किया जाता है।
इस मामले को लेकर अब अदालत में आगे की सुनवाई 15 जुलाई के बाद होगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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