अस्पताल के अनुसार, 27 वर्षीय छोटे भाई में हाल ही में ‘एडवांस डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी’ (DCM) नामक बीमारी का पता चला था। इस बीमारी में हृदय की मांसपेशियां कमजोर और बड़ी हो जाती हैं, जिससे शरीर में रक्त पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है।
चिकित्सकों ने बताया कि बड़े भाई में भी 16 साल की उम्र में इसी तरह के लक्षण सामने आए थे। इलाज के दौरान उसकी स्थिति गंभीर होने पर वर्ष 2015 में उसी अस्पताल में उसका हृदय प्रतिरोपण किया गया था।
बाद में छोटे भाई को लगातार सांस लेने में परेशानी, व्यायाम करने में कठिनाई और हृदय संबंधी समस्याओं के कारण कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जांच में उसमें भी वही बीमारी पाई गई, जिसके बाद हृदय प्रतिरोपण का फैसला लिया गया।
अस्पताल ने बताया कि हालिया सर्जरी तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि दाता और मरीज की रक्त वाहिकाओं के आकार में अंतर था। इसके लिए ऑपरेशन के दौरान विशेष शल्य चिकित्सा तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
अस्पताल के मुताबिक, हृदय दान करने वाला 37 वर्षीय व्यक्ति हरियाणा के Rohtak का निवासी था, जिसकी मस्तिष्क में रक्तस्राव के कारण मृत्यु हो गई थी।
चिकित्सकों का दावा है कि यह भारत का पहला ऐसा मामला है, जिसमें पारिवारिक कार्डियोमायोपैथी से पीड़ित दो भाइयों का एक ही अस्पताल और एक ही सर्जिकल टीम द्वारा 11 साल के अंतराल पर सफल हृदय प्रतिरोपण किया गया
Author: JAN TV Editorial Team
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