सीएमआरएल ने 26 मई के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उच्च न्यायालय ने ईडी की कार्रवाई को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति टी. आर. रवि ने अपने आदेश में कहा था कि ईडी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच जारी रखने का कानूनी अधिकार है, भले ही Serious Fraud Investigation Office की ओर से अंतिम रिपोर्ट या एफआईआर दाखिल नहीं की गई हो।
अपील में कंपनी ने तर्क दिया है कि मामले में फैसला दो बार सुरक्षित रखे जाने के बाद सुनाया गया, जिससे उसे नुकसान हुआ। कंपनी का कहना है कि अदालत ने 2025 में ईडी को अतिरिक्त हलफनामे दाखिल करने की अनुमति दी, लेकिन उन दस्तावेजों पर जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
सीएमआरएल ने यह भी दावा किया कि ईडी की जांच शुरू होने के समय कोई ऐसा 'शेड्यूल्ड अपराध' मौजूद नहीं था, जो पीएमएलए के तहत जांच का आधार बन सके। कंपनी के अनुसार, बाद में दायर शिकायतों को आधार बनाकर ईडी को अधिकार क्षेत्र देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
अपील में कंपनी ने 26 मई के फैसले को रद्द करने और अपील के अंतिम निपटारे तक उसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की है।
यह मामला 2019 में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद शुरू हुआ था। बाद में राजनीतिक कार्यकर्ता Shaun George की शिकायत के आधार पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने एसएफआईओ को कंपनी के कामकाज की जांच का निर्देश दिया था।
Author: JAN TV Editorial Team
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