मेकेदातु परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु समेत कई जिलों के लिए पेयजल और जल प्रबंधन को मजबूत करना बताया जा रहा है। परियोजना के समर्थकों का कहना है कि इससे अतिरिक्त पानी को संग्रहित किया जा सकेगा और दोनों राज्यों को लाभ मिलेगा।
हालांकि तमिलनाडु सरकार और कावेरी डेल्टा के किसान संगठनों का दावा है कि इस परियोजना से Cauvery River के जल बंटवारे पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इससे राज्य के हिस्से का पानी कम हो सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के बाद कर्नाटक सरकार संशोधित डीपीआर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में मेकेदातु परियोजना एक बार फिर दक्षिण भारत के सबसे बड़े जल विवादों में से एक का केंद्र बन गई है।
Author: JAN TV Editorial Team
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