मदर डेयरी ने इस नई पैकेजिंग की शुरुआत दिल्ली-एनसीआर में बिकने वाले अपने गाय के दूध के साथ की है। कंपनी के अनुसार, इस तकनीक पर कई वर्षों तक शोध किया गया है और इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे की समस्या को कम करना है।
मदर डेयरी और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मीनिश शाह ने बताया कि मौजूदा दूध पाउच को नष्ट होने में कई दशक लग जाते हैं, जबकि नई तकनीक से बने पाउच कुछ वर्षों में प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई प्लास्टिक, माइक्रोप्लास्टिक या विषैला पदार्थ पर्यावरण में नहीं बचेगा।
कंपनी के मुताबिक, इस पैकेजिंग में इस्तेमाल की गई विशेष तकनीक पाउच को बायो-अवेलेबल वैक्स में बदल देती है, जिसे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव प्राकृतिक तत्वों में परिवर्तित कर देते हैं।
मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्था चारी ने बताया कि नए पाउच को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह कुछ वर्षों में प्राकृतिक रूप से विघटित हो सके। खास बात यह है कि इस पर्यावरण-अनुकूल बदलाव का असर उपभोक्ताओं को मिलने वाले दूध की कीमत पर नहीं पड़ेगा।
कंपनी को उम्मीद है कि यह पहल टिकाऊ पैकेजिंग के क्षेत्र में नया मानक स्थापित करेगी और खाद्य एवं पेय उद्योग को पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।