न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनावाला की खंडपीठ ने कहा कि इस कानून के खिलाफ अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामला आयकर विभाग द्वारा 8 अगस्त 2022 को जारी नोटिस से जुड़ा है। विभाग ने आरोप लगाया था कि अनिल अंबानी ने विदेशी बैंक खातों में रखी गई 814 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित संपत्ति की जानकारी छिपाई, जिससे करीब 420 करोड़ रुपये के कर का भुगतान नहीं किया गया।
आयकर विभाग के अनुसार, अंबानी दो विदेशी संस्थाओं और स्विस बैंक खातों से जुड़े लाभकारी स्वामी थे, लेकिन उन्होंने इन विदेशी परिसंपत्तियों और वित्तीय हितों का उल्लेख अपने आयकर रिटर्न में नहीं किया। विभाग ने इसे जानबूझकर किया गया कर चोरी का मामला बताया था।
हालांकि, अंबानी ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि जिन लेन-देन की जांच की जा रही है वे वर्ष 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं, जबकि ब्लैक मनी एक्ट 2015 में लागू हुआ था। ऐसे में इस कानून को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष लंबित अपील की सुनवाई जारी रह सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय आने तक अंबानी के खिलाफ कोई दंडात्मक या अभियोजन संबंधी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अब इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत ब्लैक मनी एक्ट की संबंधित धाराओं की संवैधानिक वैधता पर विस्तार से विचार करेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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