स्टेडियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी थीम है। फ्लडलाइट्स को त्रिशूल के आकार में डिजाइन किया गया है, जबकि कमेंट्री बॉक्स डमरू की आकृति से प्रेरित है। इसके अलावा अर्धचंद्र और बेलपत्र जैसे भगवान शिव से जुड़े प्रतीकों को भी स्टेडियम की संरचना में शामिल किया गया है, ताकि यहां आने वाले दर्शकों को काशी की आध्यात्मिक विरासत की झलक मिल सके।
परियोजना प्रबंधक और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के कंसल्टेंट सरोज शुक्ला के अनुसार, स्टेडियम का पूरा डिजाइन काशी की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। निर्माण कार्य एलएंडटी द्वारा किया जा रहा है और इसका उद्देश्य आधुनिक खेल सुविधाओं के साथ शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करना है।
करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वाराणसी मंडल के आयुक्त एस. राजलिंगम के मुताबिक, लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। फिलहाल रूफिंग, डमरू संरचना और मैदान में घास लगाने का काम बाकी है, जिसे जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्माण पूरा होने के बाद इस स्टेडियम में 30,000 से अधिक दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस यह उत्तर प्रदेश का तीसरा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम होगा। इसके साथ ही यह केवल खेल का केंद्र नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतीक बनेगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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