'अरावली ग्रीन वॉल' परियोजना अफ्रीका की सफल 'ग्रेट ग्रीन वॉल' पहल से प्रेरित है और भारत के कार्बन सिंक बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप तैयार की गई है। इस परियोजना के तहत अरावली पर्वतमाला के साथ लगभग 1,400 किलोमीटर लंबी और पांच किलोमीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट विकसित करने की योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ग्रीन कॉरिडोर देशी पौधों की प्रजातियों के संरक्षण, खराब होती मिट्टी के पुनर्जीवन और पश्चिमी भारत तथा पाकिस्तान से आने वाली धूल भरी आंधियों के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा, यह जैव विविधता को बढ़ावा देने और स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना की सफलता के लिए केवल पौधारोपण पर्याप्त नहीं होगा। अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और भूमि अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ लंबे समय तक वित्तीय सहायता और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति भी जरूरी होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि 'अरावली ग्रीन वॉल' परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल अरावली के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को नया जीवन दे सकती है, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल विकास का एक सफल मॉडल भी बन सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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