राष्ट्रपति मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा आयोजित 'आध्यात्मिक जागृति के माध्यम से आदिवासी समाज का सशक्तिकरण' कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदाय धरती, सूर्य, जल और पेड़ों की पूजा करता है। वे पेड़ों का उपयोग ईंधन के रूप में तभी करते हैं जब वे पूरी तरह सूख जाते हैं और उन्हें काटने से पहले प्रार्थना भी करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति ऐसा सम्मान आधुनिक समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भौतिकवाद के इस दौर में आदिवासी समाज का जीवन सादगी, प्रेम, भाईचारे और अहिंसा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आत्मसम्मान और धैर्य के साथ जीवन जीता है। वे अपनी समस्याओं का प्रदर्शन नहीं करते, किसी से मांग नहीं करते और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन व्यतीत करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन दर्शन के अनुसार वास्तविक सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास भी उतना ही आवश्यक है। तेजी से बदलती और उपभोगवाद से प्रभावित दुनिया में आध्यात्मिक जागरूकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
खेती का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से उपजाऊ भूमि प्रभावित हो रही है, जबकि आदिवासी समुदाय सदियों से प्राकृतिक और जैविक खेती करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया फिर से जैविक खेती की ओर लौट रही है।
राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज के उत्थान के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था के प्रयासों की भी सराहना की। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल और केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके भी मौजूद रहे।
अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वह कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी, ओंकारेश्वर में पूजा-अर्चना करेंगी और कूनो नेशनल पार्क का भी दौरा करेंगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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