रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरणीय मानकों के कड़े होने से भारत में दवा निर्माण और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) की लागत भी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा कमजोर इनोवेशन और कमर्शियलाइजेशन इकोसिस्टम की वजह से नए शोध और दीर्घकालिक निवेश प्रभावित हो रहे हैं।
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि भारत को उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए। साथ ही नियामकीय पारदर्शिता बढ़ाने, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तकनीकी सहयोग मजबूत करने तथा लाइफ साइंस क्लस्टर्स में रिसर्च, पेटेंट कमर्शियलाइजेशन और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया में सस्ती जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। भारत अफ्रीका की करीब 50 प्रतिशत, अमेरिका की 40 प्रतिशत और ब्रिटेन की 25 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की जरूरत पूरी करता है।
वर्ष 2025 में वैश्विक दवा बाजार का आकार 1.3 ट्रिलियन डॉलर रहा, जिसमें 1.02 ट्रिलियन डॉलर फार्मास्युटिकल उत्पाद और 261 अरब डॉलर का API बाजार शामिल था।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत का कुल व्यापार 5.4 प्रतिशत बढ़कर 1.84 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। हालांकि, इस दौरान वस्तु निर्यात में 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि आयात 12 प्रतिशत बढ़ा। वहीं सेवा निर्यात में 9 प्रतिशत और सेवा आयात में 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
Author: JAN TV Editorial Team
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