भारत की दवा इंडस्ट्री अब भी चीन पर निर्भर, नीति आयोग ने जताई चिंता
(India) भारत की दवा उद्योग (फार्मा सेक्टर) की सप्लाई चेन अब भी चीन पर काफी हद तक निर्भर है। नीति आयोग की 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' रिपोर्ट के अनुसार, देश अपनी दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API), की-स्टार्टिंग मटेरियल (KSM) और इंटरमीडिएट्स का करीब 65 प्रतिशत आयात चीन से करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरणीय मानकों के कड़े होने से भारत में दवा निर्माण और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) की लागत भी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा कमजोर इनोवेशन और कमर्शियलाइजेशन इकोसिस्टम की वजह से नए शोध और दीर्घकालिक निवेश प्रभावित हो रहे हैं।

नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि भारत को उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए। साथ ही नियामकीय पारदर्शिता बढ़ाने, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच तकनीकी सहयोग मजबूत करने तथा लाइफ साइंस क्लस्टर्स में रिसर्च, पेटेंट कमर्शियलाइजेशन और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया में सस्ती जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। भारत अफ्रीका की करीब 50 प्रतिशत, अमेरिका की 40 प्रतिशत और ब्रिटेन की 25 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की जरूरत पूरी करता है।

वर्ष 2025 में वैश्विक दवा बाजार का आकार 1.3 ट्रिलियन डॉलर रहा, जिसमें 1.02 ट्रिलियन डॉलर फार्मास्युटिकल उत्पाद और 261 अरब डॉलर का API बाजार शामिल था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत का कुल व्यापार 5.4 प्रतिशत बढ़कर 1.84 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। हालांकि, इस दौरान वस्तु निर्यात में 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि आयात 12 प्रतिशत बढ़ा। वहीं सेवा निर्यात में 9 प्रतिशत और सेवा आयात में 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।