पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी। साथ ही अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई है। प्रयोगशाला और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में बेल्ट पर त्वचा के ऊतकों की पुष्टि होने के बाद यह फोरेंसिक राय मामले के एक महत्वपूर्ण विवाद को स्पष्ट करती है।
पहले पोस्टमार्टम के दौरान कथित लिगेचर सामग्री मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं की गई थी, जिसके कारण यह तय नहीं हो पाया था कि इस्तेमाल की गई जिम बेल्ट ही फांसी का वास्तविक माध्यम थी या नहीं। इसी वजह से हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ बोर्ड से दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था।
सूत्रों के अनुसार, वैज्ञानिक जांच में बेल्ट पर मिले त्वचा के ऊतक दूसरे पोस्टमार्टम में पाए गए लिगेचर मार्क और चोटों के पैटर्न से मेल खाते हैं। हालांकि मेडिकल बोर्ड की विस्तृत राय अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि अदालत के निर्देशानुसार पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी गई है।
एम्स दिल्ली के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि मेडिकल बोर्ड ने लगभग एक महीने तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोधों का अध्ययन करने के बाद सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार कर निष्कर्ष तैयार किया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सत्य और न्याय के हित में वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई है, लेकिन अदालत के निर्देशों के कारण इसके विवरण साझा नहीं किए जा सकते।
ट्विशा शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू थीं। 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में वह फंदे से लटकी मिली थीं। शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम पर सवाल उठने के बाद उनके परिवार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था। इसके बाद अदालत ने एम्स दिल्ली से दूसरा पोस्टमार्टम कराने और मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया था। माना जा रहा है कि एम्स की यह फोरेंसिक रिपोर्ट CBI जांच में अहम वैज्ञानिक साक्ष्य साबित होगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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