न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जुलाई 2019 में झारखंड हाईकोर्ट द्वारा लालू प्रसाद यादव को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हाईकोर्ट के विवादित आदेश में हस्तक्षेप करने का इच्छुक नहीं है। हालांकि अदालत ने लंबित अपीलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया।
सीबीआई का तर्क था कि हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को गलत तरीके से निलंबित करते हुए लालू प्रसाद यादव को जमानत दी थी।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर कोषागार से 89.27 लाख रुपये के कथित गबन से जुड़े चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराया गया था। विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उनकी सजा निलंबित कर जमानत दी थी कि वह अपनी सजा का आधा हिस्सा पूरा कर चुके हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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