मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी मंडियों के आधुनिकीकरण और पुनरोद्धार पर विशेष जोर देते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों और व्यापारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंडियों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए।
बैठक में कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए PPP मॉडल पर कृषि प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने और प्रदेश की अधिक से अधिक मंडियों को ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म से जोड़ने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और उनकी उपज के बेहतर मूल्य की संभावनाएं बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती मिशन को गति देने के लिए हर जिले में ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की व्यवस्था विकसित करने के भी निर्देश दिए। इससे प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को अपने उत्पादों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बैठक में मंडी समितियों की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि मंडी समितियों की आय बढ़कर ₹2,305.80 करोड़ पहुंच गई है। इसमें एक वर्ष के दौरान 15.79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,228.59 करोड़ की अनुमानित प्राप्तियों और ₹3,025.49 करोड़ के व्यय प्रावधान को भी मंजूरी दी गई।
इसके साथ ही किसानों के हित में संचालित किसान सहायता योजनाओं की अवधि को 30 जून 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मंडी व्यवस्था को तकनीक, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर बाजार सुविधाओं से जोड़ते हुए किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
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