संसदीय समिति ने मेटा को तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने के निर्देश दिए थे। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो कंपनी को भारत में आईटी कानून के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और कुछ छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।
इसी बीच, आईटी मंत्रालय और मेटा की ग्लोबल टीम के बीच नई दिल्ली में दो दिवसीय बैठक चल रही है। सरकार कंपनी से भारतीय कानूनों के पालन, वीआईपी अकाउंट सुरक्षा व्यवस्था, व्हाट्सऐप की यूजरनेम नीति, इंस्टाग्राम पर CSAM की मौजूदगी और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम पर जवाब मांग रही है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक पर साझा किया गया वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक से हट गया था। मेटा ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए वीडियो बहाल कर दिया और माफी भी मांगी, लेकिन सरकार ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना।
सरकार का कहना है कि भारत मेटा का सबसे बड़ा बाजार है और करोड़ों भारतीय फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कंपनी से मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, पारदर्शी कंटेंट मॉडरेशन और भारतीय कानूनों के पूर्ण अनुपालन की अपेक्षा की जाती है।
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