सीबीआई के अनुसार, गोपनीय परिसर में अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन के दौरान मिले सादे कागजों का दुरुपयोग कर प्रश्न और उत्तर नोट किए गए। आरोप है कि पी. वी. कुलकर्णी ने रसायन विज्ञान के 135 प्रश्नों के विकल्प छोटी पर्चियों पर लिखकर बाहर निकाले और होटल में बाकी सवाल याददाश्त के आधार पर तैयार किए।
जांच में यह भी सामने आया कि एनटीए के गोपनीय परिसर में प्रवेश और निकास के समय विशेषज्ञों की तलाशी नहीं होती थी। वहीं, सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग के लिए कोई समर्पित कंट्रोल रूम भी मौजूद नहीं था, जिससे पूरी साजिश लंबे समय तक पकड़ी नहीं गई।
चार्जशीट के मुताबिक, लीक हुए प्रश्न बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए कोचिंग संचालकों और एजेंटों तक पहुंचे, जहां से उन्हें लाखों रुपये लेकर उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया। ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों में पेपर की कीमत, सवालों की संख्या और लेन-देन की बातचीत का भी उल्लेख है।
सीबीआई ने बताया कि फोरेंसिक जांच में जब्त प्रश्नपत्रों पर मिली लिखावट का मिलान विषय विशेषज्ञों की हैंडराइटिंग से हुआ है। डिजिटल डिवाइस, हस्तलिखित नोट्स और अन्य दस्तावेजों ने भी पेपर लीक की साजिश की पुष्टि की है। यह मामला फिलहाल विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन है।
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।