कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने साफ किया है कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य 'एक प्रदेश, एक कानून' की भावना को पूरी तरह परिपूर्ण करना है। इस नए एक्ट के जरिए तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसी व्यवस्थाओं को कानूनी रूप से बेहद व्यवस्थित बनाया गया है।
इस कानून के तहत अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि विवाह का रजिस्ट्रेशन 60 दिन के भीतर कराना होगा। इतना ही नहीं, तलाक का रजिस्ट्रेशन कराना और 'लिव-इन रिलेशनशिप' की शुरुआत व उसकी समाप्ति की जानकारी देना भी जरूरी होगा। यदि कोई इन नियमों का पालन नहीं करता और तय समय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उस पर 10 हजार रुपए तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस एक्ट के दायरे से आदिवासी और जनजाति क्षेत्रों के पारंपरिक रीति-रिवाजों को पूरी तरह से बाहर रखा गया है।
कैबिनेट बैठक का दूसरा सबसे बड़ा फोकस पर्यावरण संरक्षण पर रहा। संत समुदाय और पर्यावरण प्रेमियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने 'ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट' को मंजूरी दी है। इसके तहत कल्पवृक्ष कहे जाने वाले खेजड़ी और राज्य वृक्ष रोहिड़ा सहित कुल 29 प्रजाति के पेड़ों को काटना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह कानून व्यक्तिगत भूमि यानी घर के आसपास के 500 मीटर के दायरे को छोड़कर बाकी जगहों पर भी प्रभावी होगा।
यदि विशेष परिस्थितियों में पेड़ काटना बहुत जरूरी हो जाता है, तो इसके लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी होगी। मंजूरी मिलने पर काटे गए पेड़ों से 10% अधिक नए पौधे लगाने होंगे। अगर कोई व्यक्ति पेड़ लगाने में असमर्थता जताता है, तो उसे एक निश्चित राशि जमा करानी होगी, जिससे सरकार खुद पौधे लगवाएगी। वहीं, बिना अनुमति के पेड़ काटने पर दोषी पाए जाने पर 1 लाख रुपए का जुर्माना और 1 साल तक की जेल की सजा का कड़ा प्रावधान किया गया है।
सरकार ने कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए आवश्यक सेवा अनुभव में 2 साल की छूट देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इस छूट की घोषणा पहले ही बजट में कर दी गई थी, लेकिन कैबिनेट से औपचारिक अनुमोदन न मिलने के कारण इसका नोटिफिकेशन जारी नहीं हो पा रहा था। अब इस मंजूरी के बाद पिछले 3 साल में इस छूट का लाभ न ले पाने वाले सभी कर्मचारी इसके दायरे में आ जाएंगे और उन्हें तय अनुभव में 2 साल की सीधी छूट मिल सकेगी।"
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