CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह छात्रों और उनके बीच की बातचीत का मामला है। इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दखल देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने BCI के सर्कुलर को "बिल्कुल बेवजह" बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में BCI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि NALSAR के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
पूरा विवाद NALSAR के दीक्षांत समारोह से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों ने CJI सूर्यकांत को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था।
छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को दिए गए निमंत्रण को वापस लेने की मांग की थी। छात्रों का कहना था कि यह विरोध CJI की उन टिप्पणियों को लेकर है, जो उन्होंने प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की थीं।इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों का वकील के तौर पर एनरोलमेंट अगले आदेश तक न किया जाए।
BCI ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन में रिपोर्ट भी मांगी थी और विरोध अभियान शुरू करने, उसे आयोजित करने या छात्रों को जुटाने वाले लोगों की जानकारी मांगी थी।विरोध और आलोचना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपना फैसला बदल दिया। BCI ने कहा कि 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए।
इसके बाद NALSAR के सभी छात्र अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट करा सकते हैं।
BCI ने हालांकि कहा कि वह यूनिवर्सिटी से मांगी गई रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। बाद में काउंसिल ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दी और कहा कि किसी भी छात्र की आंदोलन या किसी अनुशासनहीन गतिविधि में भूमिका नहीं मिली है।
बार काउंसिल के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी सवाल उठाए थे।SCBA अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा था कि छात्रों को अपनी राय रखने के कारण वकालत में प्रवेश से रोकने की धमकी देना अनुचित है। उन्होंने BCI की कार्रवाई को मनमाना और जरूरत से ज्यादा बताया था।
छात्रों के विरोध की एक वजह CJI सूर्यकांत की कुछ पुरानी टिप्पणियां भी बताई जा रही हैं।एक सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कुछ युवाओं के व्यवहार को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ युवा रोजगार नहीं मिलने के बाद मीडिया, सोशल मीडिया, RTI और अन्य माध्यमों से सक्रिय होकर लोगों पर हमला करने लगते हैं।इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसी क्रम में 16 जुलाई को "कॉकरोच जनता पार्टी" नाम से एक सोशल मीडिया पेज बनाया गया और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया गया।
फिलहाल NALSAR विवाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद छात्रों के एनरोलमेंट पर लगी रोक हट चुकी है और BCI को अपने फैसले पर जवाब देना होगा।
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।