कानपुर के हाथीपुर क्षेत्र में यूनिट के विस्तार की योजना तैयार की गई है। प्रस्तावित विस्तार करीब 250 एकड़ क्षेत्र में होगा, जिसमें लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।कंपनी के मुताबिक, कानपुर में अब तक करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। आने वाले वर्षों में करीब 4,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश की योजना भी है।निवेश बढ़ने के साथ रक्षा उत्पादन के अलावा लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और दूसरी सहायक गतिविधियों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
कानपुर यूनिट में फिलहाल करीब 2,000 कुशल और अकुशल कर्मचारी काम कर रहे हैं। उत्पादन क्षमता में विस्तार के साथ कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।इसका असर आसपास के इलाकों में परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और अन्य औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।यूनिट में अभी अलग-अलग प्रकार के एम्युनिशन का उत्पादन किया जा रहा है। मौजूदा क्षमता करीब 15 करोड़ राउंड सालाना है, जिसे साल के अंत तक बढ़ाकर करीब 30 करोड़ राउंड करने का लक्ष्य रखा गया है।
यहां छोटे हथियारों के लिए स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन से लेकर टैंक और आर्टिलरी में इस्तेमाल होने वाले लार्ज-कैलिबर एम्युनिशन तक तैयार किए जा रहे हैं। मीडियम-कैलिबर एम्युनिशन का उत्पादन भी शुरू करने की तैयारी है और इसके 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है।
कंपनी ग्रेनेड उत्पादन की क्षमता भी बढ़ाने की योजना बना रही है। लक्ष्य के मुताबिक, 2027 तक सालाना 40 लाख ग्रेनेड बनाने की क्षमता विकसित की जाएगी।इसके बाद 2029 तक इतनी ही अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना है। इससे घरेलू रक्षा जरूरतों को पूरा करने और विदेशों से गोला-बारूद की खरीद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।कानपुर यूनिट में छोटे हथियारों के निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। यहां अभय राइफल और प्रहार लाइट मशीन गन समेत कई स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन किया गया।अधिकारियों के अनुसार, अभय राइफल में 5.56 एमएम और 9 एमएम एम्युनिशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, प्रहार LMG को सेना की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात कही गई है।
कानपुर यूनिट में AI आधारित केस-लाइन इंस्पेक्शन टेक्नोलॉजी के जरिए एम्युनिशन केस की जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया के दौरान गुणवत्ता जांच को अधिक स्वचालित और सटीक बनाना है।
कंपनी के मुताबिक, यहां बनाए जा रहे एम्युनिशन और आर्टिलरी सिस्टम NATO मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं। इससे अलग-अलग हथियार प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और समान प्रदर्शन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।कंपनी का कहना है कि उसके एम्युनिशन की मांग मित्र देशों से भी आ रही है। इससे भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए निर्यात के नए अवसर बनने की संभावना है।
कंपनी के CEO आशीष राजवंशी ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने देश में पर्याप्त एम्युनिशन उत्पादन क्षमता मौजूद होने की जरूरत को सामने रखा।
UP डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में कानपुर में बढ़ता निवेश इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उत्पादन क्षमता, निवेश और आधुनिक तकनीक के विस्तार के साथ कानपुर की पहचान पारंपरिक औद्योगिक शहर से आगे बढ़कर एक महत्वपूर्ण रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है।
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