NTA के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि हजारों छात्रों को NTA की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि 22 से 30 जून के बीच सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स विषयों की UGC-NET परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। उनके मुताबिक, करीब दो महीने बाद NTA ने इन तीनों परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया।
राहुल ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र तैयार करने में गड़बड़ी हुई और पुराने सवाल दोबारा पूछे गए। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने लंबे समय तक तैयारी की, परीक्षा फॉर्म भरे, फीस जमा की और दूर-दराज के केंद्रों तक सफर किया, उन्हें अब सितंबर में फिर वही प्रक्रिया दोहरानी पड़ेगी।कांग्रेस नेता ने कहा कि गलती परीक्षा कराने वाली एजेंसी की है, लेकिन उसका असर छात्रों की पढ़ाई, समय और मेहनत पर पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने NTA से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि एजेंसी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी।उन्होंने पेपर लीक की आशंका का भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो चुके थे।राहुल ने कहा कि उन्होंने कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए हैं और आगे भी छात्रों के हितों से जुड़े सवाल उठाते रहेंगे।कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा परीक्षा व्यवस्था छात्रों से उनकी मेहनत, समय और पैसा ले रही है, लेकिन बदले में उन्हें पर्याप्त भरोसा नहीं मिल रहा।उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, क्योंकि एक परीक्षा में होने वाली गड़बड़ी का सीधा असर हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ता है।राहुल ने यह भी कहा कि UGC-NET री-एग्जाम देने वाले छात्रों को यह समझना चाहिए कि परीक्षा दोबारा होने की स्थिति उनकी गलती नहीं है।
राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा इस दिशा में पहला कदम होना चाहिए और केवल यहीं तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिएउन्होंने NTA के शीर्ष नेतृत्व की भी जवाबदेही तय करने की मांग की।
NTA के फैसले के मुताबिक UGC-NET जून 2026 के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के उम्मीदवारों को संबंधित पेपर दोबारा देना होगा। इसके लिए सितंबर में परीक्षा आयोजित की जाएगी।री-एग्जाम के फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के सामने अब दोबारा तैयारी और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की चुनौती है। वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
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