बोर्ड बैठक में सेक्टर-13 और सेक्टर-14 में करीब 500 एकड़ भूमि पर मेडिकल हब विकसित करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही सेक्टर-14 में 480 एकड़ में यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना को भी आगे बढ़ाया गया है।
मेडिकल हब के जरिए क्षेत्र में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े उद्योगों के विस्तार की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए सेक्टर-23डी में करीब 50 एकड़ भूमि पर आधुनिक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई है।स्टेडियम के तैयार होने के बाद बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के साथ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने की संभावना है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के आसपास बढ़ती यातायात जरूरतों को देखते हुए सेक्टर-23सी में अंतर्राज्यीय बस अड्डे के लिए भूमि चिन्हित करने का फैसला लिया गया है।इससे एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों के बीच सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी विनिर्माण में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सेक्टर-06 में 300 एकड़ भूमि ताइवान सिटी के लिए आरक्षित करने को मंजूरी दी गई है।इस क्षेत्र में ताइवान से जुड़ी कंपनियों और तकनीकी विनिर्माण इकाइयों को आकर्षित करने की योजना है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का इकोसिस्टम मजबूत हो सकता है।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए सेक्टर-06 में करीब 100 से 125 एकड़ भूमि पर फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने का निर्णय लिया गया है।
प्रस्तावित क्लस्टर में GMP मानकों के अनुरूप दवाओं के निर्माण की इकाइयां स्थापित करने की योजना है। यहां टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन, ओरल लिक्विड और अन्य फिनिश्ड डोज फॉर्म तैयार करने वाली कंपनियों को जगह मिल सकती है।इससे यूपी को फार्मा मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल फार्मा सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यीडा के मेडिकल डिवाइस पार्क में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।प्रस्तावित सुविधा में इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कंपैटिबिलिटी, मैकेनिकल परफॉर्मेंस, सॉफ्टवेयर वैलिडेशन, स्टेरलाइजेशन और पैकेजिंग वैलिडेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।इससे भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों और MSME इकाइयों को देश में ही परीक्षण की सुविधा मिल सकती है और विदेशों पर निर्भरता कम हो सकती है।
किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सेक्टर-34 में करीब 36 एकड़ भूमि पर आधुनिक मंडी विकसित करने के लिए जमीन चिन्हित की गई है।यहां कृषि उत्पादों की बिक्री, भंडारण और व्यापार से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे क्षेत्र के किसानों को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।औद्योगिक विकास के लिए किसानों से सहमति के आधार पर जमीन खरीदने की दर में भी बढ़ोतरी की गई है।
फेज-1 में गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर क्षेत्र में भूमि खरीद की दर 4,300 रुपये से बढ़ाकर 4,558 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी गई है। यानी दर में करीब 6 फीसदी की वृद्धि हुई है।वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 4,037 रुपये प्रति वर्ग मीटर और 7 प्रतिशत आबादी भूखंड के साथ जमीन खरीदने का विकल्प भी रखा गया है।
बोर्ड बैठक में यीडा की वित्तीय स्थिति की जानकारी भी साझा की गई। 31 जुलाई 2025 तक प्राधिकरण की कुल प्राप्तियां 974.37 करोड़ रुपये थीं, जो 31 जुलाई 2026 तक बढ़कर 1,853.74 करोड़ रुपये हो गईं।इस तरह समान अवधि में कुल प्राप्तियों में 90.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।औद्योगिक और मिक्स लैंड योजना से ही 1,195.99 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई, जो पूरे साल के निर्धारित बजट का 86.17 प्रतिशत बताई गई है।
यीडा की 92वीं बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों से जेवर एयरपोर्ट के आसपास तेजी से विकसित हो रहे आर्थिक क्षेत्र को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है।मेडिकल हब, फार्मा क्लस्टर, ताइवान सिटी, मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग सेंटर, यूनिवर्सिटी टाउनशिप, इंटरनेशनल स्टेडियम और इंटरस्टेट बस अड्डे जैसी परियोजनाएं एक ही क्षेत्र में उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीक, खेल और कनेक्टिविटी का बड़ा नेटवर्क तैयार कर सकती हैं।इन योजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार बढ़ाने के साथ जेवर-नोएडा एयरपोर्ट क्षेत्र को भविष्य के बड़े औद्योगिक और संस्थागत केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
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