उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में कड़ी गोपनीयता बरती जाती है। उनके मुताबिक NEET परीक्षा के लिए तैयार किया गया सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना आसान नहीं है।
सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि NEET के प्रश्नपत्र ले जाने वाली गाड़ियों में GPS लगाया जाता है। गाड़ियों की छोटी से छोटी गतिविधि भी रिकॉर्ड होती है। इसके अलावा कई मॉडरेटर से प्रश्न बैंक तैयार कराया जाता है और उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि इनमें से कौन से सवाल अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल किए जाएंगे।सरकार की ओर से कोर्ट को यह बताने की कोशिश की गई कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर व्यवस्था की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सॉलिसिटर जनरल द्वारा बताई गई सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा राधाकृष्णन कमिटी पहले ही कर चुकी है। कोर्ट ने कहा कि कमिटी ने परीक्षा प्रणाली से जुड़ी संस्थागत समस्याओं की ओर भी इशारा किया था।
अदालत ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल मौजूदा व्यवस्था को देखना नहीं, बल्कि ऐसा दूरगामी समाधान तलाशना है जिससे भविष्य में इस तरह की समस्याओं को रोका जा सके।सुप्रीम कोर्ट ने UPSC का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां परीक्षाएं बिना ऐसी समस्याओं के आयोजित हो रही हैं। कोर्ट ने कहा कि NTA को भी परीक्षा प्रणाली में इसी तरह की मजबूती लानी होगी।
अदालत ने बदलती तकनीक को समझने वाले विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि परीक्षा प्रणाली तकनीकी चुनौतियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके।NEET UG पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा के साथ-साथ संस्थागत सुधार और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर देखने को मिला।
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