भारत-नेपाल सीमा विवाद पर देहरादून में बड़ी बैठक, पुराने नक्शों और रिकॉर्ड से समाधान की कोशिश
(Dehradun, Dehradun) उत्तराखंड के देहरादून में भारत और नेपाल के बीच सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर 14वीं संयुक्त कार्य समूह यानी JWG की बैठक शुरू हो गई है। मसूरी रोड स्थित एक निजी होटल में दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारी सीमा विवाद, सीमा निर्धारण, सुरक्षा और व्यापारिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पौसुमी बसु कर रही हैं, जबकि नेपाल के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई नेपाल गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आनंद काफ्ले कर रहे हैं। बैठक में गृह मंत्रालय, आईटीबीपी, सेना और सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी भी शामिल हैं।

सीमा विवाद के समाधान के लिए सर्वे ऑफ इंडिया के ब्रिटिश शासनकालीन नक्शों और पुराने अभिलेखों का अध्ययन किया जाएगा। दोनों देशों के अधिकारी इन दस्तावेजों का मौजूदा भौगोलिक स्थिति से मिलान कर विवादित क्षेत्रों को लेकर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।

सीमा निर्धारण और जमीन से जुड़े मामलों में पुराने रिकॉर्ड की भूमिका अहम मानी जा रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और वर्तमान स्थिति का अध्ययन कर सीमा से जुड़े विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

देहरादून में हो रही बैठक में सीमा सुरक्षा और प्रबंधन के साथ दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी चर्चा होगी। सीमा से जुड़े पुराने विवादों के अलावा व्यापार और स्थानीय स्तर पर आवाजाही से संबंधित मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहेंगे।

इससे पहले 14 अगस्त को लखनऊ में भारत और नेपाल के सर्वे अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें सीमा पार जमीन, खेती और निर्माण से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए ड्रोन सर्वे जैसी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर सहमति बनी थी। ड्रोन से ली गई तस्वीरों और जमीन से जुटाए गए आंकड़ों का दोनों देशों के अधिकारी संयुक्त रूप से अध्ययन करेंगे। देहरादून की बैठक में इस तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।

भारत और नेपाल के बीच करीब 1751 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो भारत के पांच राज्यों से होकर गुजरती है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधम सिंह नगर जिले नेपाल से जुड़े हैं। इन क्षेत्रों में दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से आवाजाही और व्यापार होता रहा है।

उत्तर प्रदेश के भी सात जिले नेपाल सीमा से जुड़े हैं। ऐसे में सीमा विवाद के साथ स्थानीय व्यापार और आवागमन को सुचारु बनाए रखना भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है।

नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार बनने के बाद भारत-नेपाल संबंधों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है। दोनों देशों के अधिकारी सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के साथ व्यापार और आपसी सहयोग को बेहतर बनाने के रास्तों पर भी चर्चा कर रहे हैं।

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