मुख्यमंत्री ने जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के संचालन में व्यापक बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने विद्यालयों के लिए सुस्पष्ट नियमावली तैयार करने, शिक्षकों के रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया में तेजी लाने और एक सोसाइटी के गठन की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में 93 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित थे। वर्ष 2025-26 तक इनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई है। इनमें 59 विद्यालय सीबीएसई और 44 विद्यालय यूपी बोर्ड से संबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद जल्द भरे जाएं। साथ ही विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप अन्य जरूरी मानव संसाधन भी उपलब्ध कराया जाए।
वृद्धावस्था पेंशन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पात्र वृद्धजनों के लंबित आवेदनों का शीघ्र सत्यापन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र बुजुर्गों को पेंशन के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़े और आवेदन से लेकर स्वीकृति तक की प्रक्रिया समयबद्ध हो।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या वर्ष 2017-18 में 37.47 लाख थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 67.50 लाख हो गई है। वर्तमान में करीब 11.50 लाख नए आवेदन लंबित हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के मुताबिक, योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में 163 केंद्रों के माध्यम से संचालित है। इन केंद्रों पर 1,783 इम्पैनल्ड शिक्षक हैं और UPSC, PCS, NEET, JEE, NDA/CDS समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 23,801 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। योजना के तहत चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और अनुभवी शिक्षकों व विशेषज्ञों का अधिक से अधिक विद्यार्थियों को लाभ दिलाने पर जोर दिया।
छात्रवृत्ति वितरण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को समय पर छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए। उन्होंने पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति से वंचित विद्यार्थियों के लिए आवेदन पोर्टल तत्काल खोलने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से हर हाल में 2 अक्टूबर तक छात्रवृत्ति की धनराशि पात्र विद्यार्थियों के खातों में अंतरित करने को कहा।
बैठक में बताया गया कि विभिन्न कारणों से छात्रवृत्ति से वंचित करीब 3.16 लाख विद्यार्थियों को दोबारा अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें 31,836 शासकीय, 69,631 अनुदानित और 2,46,426 निजी संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हैं।
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