चीनी के दाम 70 रुपये किलो तक पहुंचे, खड़गे ने सरकार से पूछे 3 सवा, केंद्र बोला- एथेनॉल वजह नहीं
(India) देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चीनी के बढ़ते दाम और घटते स्टॉक को लेकर सरकार से तीन सवाल पूछे। खड़गे ने पूछा कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया और विदेश से 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की नौबत क्यों आई।

खड़गे ने एथेनॉल नीति पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि एक तरफ सरकार विदेश से चीनी मंगा रही है, जबकि दूसरी ओर गन्ने को एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किया जा रहा है।

देश के कई हिस्सों में चीनी की खुदरा कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। पिछले तीन महीनों में इसके दाम करीब 40% यानी लगभग 19 रुपये प्रति किलो तक बढ़ने की बात सामने आई है।

कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर को बिना आयात शुल्क के मंगाने की मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना है।चीनी के अलावा पिछले तीन महीनों में गुड़ करीब 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा होने की बात भी सामने आई है।


चीनी की कीमत बढ़ने की एक प्रमुख वजह मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक में कमी को माना जा रहा है। पिछले सीजन में नई पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का स्टॉक था, जो इस बार घटकर लगभग 32 लाख टन रह गया है।वहीं, 2025-26 में देश में चीनी उत्पादन का अनुमान भी शुरुआती अनुमान से कम होकर करीब 306 लाख टन रह गया है। शुरुआती अनुमान 343 लाख टन का था।

केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है।खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव जैसे कई कारण हैं।

उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48 रुपये प्रति किलो थी, जो बढ़कर 56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। वहीं, एक्स-मिल कीमत 7 से 10 दिनों के भीतर 47-48 रुपये से बढ़कर करीब 62 रुपये प्रति किलो हो गई।खाद्य सचिव ने मिलों की ओर से अचानक कीमत बढ़ाए जाने को अनुचित बताया।


सरकार के मुताबिक, देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से आता है। बाकी एथेनॉल मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से तैयार किया जाता है।

एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गई। मौजूदा सीजन में एथेनॉल उत्पादन के लिए करीब 28 लाख टन चीनी डायवर्ट किए जाने की बात कही गई है।

हालांकि, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार, पिछले साल करीब 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसमें अनाज और गन्ने से मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल किया गया।

भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड करीब 1.1 करोड़ टन चीनी का निर्यात किया था। इसके बाद निर्यात में कमी आई है।

घरेलू बाजार में सप्लाई कम होने पर सरकार कच्ची चीनी आयात कर उसे देश की मिलों में रिफाइन कर बाजार में उतारती है। इससे पहले 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब एक दशक बाद फिर विदेशी चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है।

2025-26 में चीनी उत्पादन का अनुमान 306 लाख टन रहने की संभावना है। उत्पादन में कमी की वजह गन्ने की फसल को हुए नुकसान को बताया जा रहा है।

रेड रॉट, टॉप बोरर और ज्यादा बारिश जैसी वजहों से गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि सितंबर 2026 के अंत तक देश में करीब 33-35 लाख टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध रहेगा।सरकार का दावा है कि घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए यह स्टॉक पर्याप्त है।
सरकार के अनुसार, इस बार चीनी मिलों में नए पेराई सीजन की शुरुआत करीब 15 अक्टूबर से हो सकती है। अक्टूबर में लगभग 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है।

सरकार का कहना है कि इससे त्योहारों के दौरान घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त रहेगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है। डीलर्स के लिए चीनी स्टॉक की सीमा 400 टन तय की गई है।वहीं, 1 सितंबर से बड़े थोक खरीदार 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।

अब चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ सरकार की नजर घरेलू उत्पादन, आयात और आगामी पेराई सीजन पर है। अक्टूबर से बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने के बाद कीमतों पर इसका कितना असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।

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