अमरावती के पुलिस कमिश्नर राकेश ओला के मुताबिक, NICU के तीन कंपार्टमेंट में से एक में 9 नवजात भर्ती थे। आग इसी हिस्से में फैली और तीन बच्चे इसकी चपेट में आ गए। बाकी छह बच्चों को इलाज के लिए दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
हादसे के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। अचलपुर निवासी योगेश सावर्कर ने बताया कि उनकी पत्नी और 8 दिन का बच्चा अस्पताल में भर्ती था। आग लगने के समय वह अस्पताल के बाहर सो रहे थे।
योगेश के मुताबिक, NICU से आग और धुआं निकलने की जानकारी मिलते ही वह पहली मंजिल की ओर दौड़े और अपने बच्चे को गोद में लेकर बाहर निकले। उन्होंने बताया कि कई बच्चों के शरीर पर काली राख जमी हुई थी।
परिजनों के अनुसार, गार्ड सबसे पहले बच्चों को बचाने के लिए वार्ड में पहुंचे। उन्होंने बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया। एक नर्स ने भी बचाव कार्य में मदद की।आग तेजी से फैलने के कारण NICU धुएं से भर गया था और कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।
परिजनों का दावा है कि आग लगने के बाद अस्पताल का वॉटर स्प्रे सिस्टम काम नहीं कर रहा था। उनका कहना है कि आग लगते ही यह सिस्टम सक्रिय होना चाहिए था।
परिजनों ने अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच कराने और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।हालांकि, फायर सेफ्टी सिस्टम के काम नहीं करने के दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। हादसे की विस्तृत जांच के बाद ही आग के कारण और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की हाईलेवल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को अमरावती जाकर घटनास्थल का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं।साथ ही राज्य सरकार की ओर से हादसे में जान गंवाने वाले नवजातों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
अमरावती की घटना से महज दो दिन पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के NICU में भी आग लग गई थी। शनिवार देर रात करीब 2 बजे वार्मर मशीन के फिलामेंट से निकली चिंगारी के बाद आग लगी थी।
इस हादसे में तीन नवजात झुलस गए थे, जिनमें से एक की मौत हो गई। अस्पताल स्टाफ ने फायर फाइटिंग उपकरणों की मदद से आग पर काबू पाया था।
लगातार दो राज्यों के अस्पतालों में NICU में आग की घटनाओं ने नवजातों के लिए अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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