प्रशस्त 2.0 के तहत शिक्षकों को बच्चों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया, उसकी आवश्यकता और बच्चों की शैक्षिक जरूरतों को समझने से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि स्क्रीनिंग केवल औपचारिक प्रक्रिया न रहकर बच्चों की वास्तविक जरूरतों की पहचान का प्रभावी माध्यम बने।महानिदेशक, स्कूल शिक्षा के निर्देशों के तहत सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को शिक्षकों को सेंसेटाइजेशन वीडियो देखने के लिए निर्देशित किया गया है।
इस व्यवस्था के दायरे में परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षक शामिल हैं। सभी संबंधित शिक्षकों को प्रशस्त एप/पोर्टल से जोड़ा जा रहा है, ताकि स्क्रीनिंग शुरू होने से पहले उन्हें एक समान जानकारी और जरूरी संवेदनशीलता उपलब्ध कराई जा सके।
सेंसेटाइजेशन वीडियो ऑनलाइन उपलब्ध होने से शिक्षक अपने स्तर पर इन्हें देख सकेंगे। इससे प्रदेशभर में बड़ी संख्या में शिक्षकों तक प्रशिक्षण सामग्री पहुंचाने की प्रक्रिया आसान होगी।सरकार का मानना है कि तकनीक और शिक्षक की संवेदनशीलता को साथ जोड़कर बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं की पहचान को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
‘प्रशस्त 2.0’ के जरिए बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को तैयार करने से विद्यालय स्तर पर जरूरतमंद बच्चों की पहचान और उन्हें उपयुक्त शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
योगी सरकार की यह पहल समावेशी और जरूरत आधारित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर सामने आई है।
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।