घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम उत्पाद व खाद्य वस्तुएं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतें कम रहने से थोक महंगाई में भारी गिरावट आई है। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति दर अक्टूबर में घटकर 1.77 प्रतिशत रह गई है, जो पांच साल में सबसे कम है। थोक महंगाई दर सितंबर में 2.38 फीसद तथा पिछले साल अक्टूबर में 7.24 प्रतिशत थी। थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति दर में गिरावट को सरकार के हित में करार देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम रहने से आने वाले दिनों में महंगाई और नीचे आएगी आएगी। इस बीच मुद्रास्फीति दर में कमी से उत्साहित उद्योग जगत ने ब्याज दरों में कटौती की फिर मांग की है। उसका कहना है कि अभी दरों में कमी की काफी गुंजाइश है। माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक दो दिसंबर को मौद्रिक एवं ऋण नीति की समीक्षा करते वक्त ब्याज दरें घटाने पर विचार कर सकता है। इससे पहले थोक महंगाई का न्यूनतम स्तर सितंबर, 2009 में 1.4 प्रतिशत था। उस समय केंद्रीय बैंक का रेपो रेट (कम अवधि के कर्जों पर आरबीआइ द्वारा बैंकों से वसूली जाने वाली ब्याज दर) 4.75 प्रतिशत थी। अब महंगाई 1.77 प्रतिशत है जबकि रेपो दर आठ प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर कायम है। इस तरह महंगाई के निचले स्तर के अनुरूप ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश है।
Digital Desk: Kamal
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