हिंदू परंपरा में पिंडदान और तेरहवीं आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद किए जाते हैं, लेकिन रामलोटन कुशवाहा ने मृत्यु के बाद अपने शरीर को दान करने का संकल्प लेते हुए यह अनुष्ठान पहले ही कर लिया। उनका कहना है कि समाज में शरीरदान को लेकर कई गलत धारणाएं हैं और लोग इसे अंतिम संस्कार के खर्च से बचने का तरीका मानते हैं। वे इस सोच को बदलना चाहते हैं।
रामलोटन कुशवाहा औषधीय जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए भी जाने जाते हैं और उनके कार्यों का उल्लेख प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया था।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि इस पहल से गांव और आसपास के क्षेत्रों में अंगदान और शरीरदान को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है। पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मेहमानों को भोजन भी परोसा गया।
कुशवाहा का मानना है कि मृत्यु के बाद अंगदान और शरीरदान से जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सकती है और चिकित्सा अनुसंधान को भी मदद मिलती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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