इन वाहनों में दोपहिया, ऑटो-रिक्शा और लग्जरी कारें तक शामिल हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बार ये वाहन थानों की सीमा से बाहर निकलकर आसपास के सार्वजनिक स्थानों तक फैल जाते हैं।
अधिकांश वाहन यातायात नियमों के उल्लंघन या आपराधिक मामलों में जब्त किए गए हैं, जबकि कुछ वाहन सड़क किनारे लावारिस अवस्था में पाए जाने के बाद पुलिस ने कब्जे में लिए थे। कई वाहन लंबे समय से कानूनी प्रक्रियाओं में फंसे हुए हैं, जिसके कारण उनका निपटान नहीं हो सका है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए वाहनों के निपटान की प्रक्रिया को तेज करने और समर्पित वाहन यार्ड बनाने की आवश्यकता है, जहां तय समय-सीमा में नीलामी या अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
वहीं आलोचकों का कहना है कि नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में जमीन की कीमत बहुत अधिक है, ऐसे में इन वाहनों को जल्द हटाकर सार्वजनिक उपयोग के लिए स्थान खाली कराया जाना चाहिए।
प्रशासन पर अब दबाव बढ़ रहा है कि वह इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले, ताकि पुलिस थानों की व्यवस्था और शहर की सार्वजनिक जगहों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
Author: JAN TV Editorial Team
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