यह घटना उमरिया जिले के पनपथा गांव में रविवार तड़के हुई, जब बाघ गांव में घुस आया और लोगों पर हमला कर दिया। बाद में रेस्क्यू अभियान के दौरान बाघ एक घर के अंदर मिला।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि जब रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची तो बाघ में कोई हलचल नहीं दिखाई दी। स्थिति की गंभीरता और मौके पर मौजूद भीड़ को देखते हुए टीम ने ट्रैंक्विलाइजर डार्ट का इस्तेमाल किया, लेकिन बाघ की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उसका शव बरामद किया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाघ की मौत ट्रैंक्विलाइजर की ओवरडोज से हुई है या नहीं, इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
वन्यजीव विशेषज्ञ मनीष कुलश्रेष्ठ का कहना है कि भीषण गर्मी, तनाव और लगातार भागदौड़ के कारण बाघ पहले से ही बेहद कमजोर हो सकता था। उन्होंने बताया कि ट्रैंक्विलाइजर में इस्तेमाल होने वाले रसायन शरीर के तापमान नियंत्रण को प्रभावित करते हैं, जिससे गर्म मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बार-बार हो रहे बाघ हमलों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और कथित तौर पर एक वन रेंजर के साथ मारपीट भी की।
फिलहाल वन विभाग और प्रशासन मामले की जांच में जुटे हुए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
Author: JAN TV Editorial Team
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