भारत के प्रधान न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया के जरिए अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा का उल्लंघन किया है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि विवादित प्रक्रिया केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं अपनाई गई थी, बल्कि यह चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने में सहायक है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत निर्वाचन आयोग को इतने व्यापक स्तर पर SIR कराने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही इसे राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) जैसी प्रक्रिया बताया गया था, जिसमें नागरिकता जांच का आरोप लगाया गया।
निर्वाचन आयोग ने अपने बचाव में कहा था कि आधार और वोटर आईडी को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता और मतदाता सूची को शुद्ध करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। आयोग ने बताया कि अभियान के दौरान 65 लाख नाम हटाए गए थे।
कोर्ट ने पहले 29 जनवरी को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था, और अब अपने निर्णय में SIR प्रक्रिया को वैध ठहराया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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