महज 14 साल की उम्र में साइकिलिंग शुरू करने वाले बोमी जागीरदार ने देश के कई चुनौतीपूर्ण मार्गों पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। दिल्ली से मुंबई तक 1500 किलोमीटर की दूरी सात दिनों में और कश्मीर से कन्याकुमारी तक करीब 4000 किलोमीटर की यात्रा मात्र 15 दिनों में पूरी कर चुके हैं। इसके अलावा मनाली-लेह, खारदुंग ला और नेपाल तक की कठिन यात्राएं भी उनके नाम दर्ज हैं।
साइकिलिंग समुदाय में उन्हें सम्मानपूर्वक 'साइकिलिंग के भीष्म पितामह' के नाम से जाना जाता है। उनके साथी बताते हैं कि उन्होंने न केवल खुद साइकिलिंग को जीवनशैली बनाया, बल्कि कई लोगों को इस खेल से जोड़कर प्रेरित भी किया।
आज भी बोमी जागीरदार रोज सुबह लगभग 50 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उम्र को चुनौती देते हुए वह अब नवसारी से भूटान और थाईलैंड तक साइकिल यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।
विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर बोमी जागीरदार की कहानी यह संदेश देती है कि जुनून, अनुशासन और निरंतरता के दम पर उम्र कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बनती।
Author: JAN TV Editorial Team
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