विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एस. बी. सिंह के अनुसार, यह प्रस्ताव क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत तथा परमार वंश के राजा भोज के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से लाया गया है। प्रस्ताव को बुधवार को हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में मंजूरी दी गई और अब इसे अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
प्रस्ताव में कहा गया है कि राजा भोज ने क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और भोपाल का प्राचीन नाम “भोजपाल” माना जाता रहा है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय का नाम “वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी” रखने की सिफारिश की गई है।
हालांकि इस प्रस्ताव का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि 38 वर्षों से स्थापित संस्थान का नाम बदलना अनुचित है और यह महान क्रांतिकारी बरकतुल्ला भोपाली की विरासत का अपमान है।
इसी बीच एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शन कर नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया। छात्र संगठन ने इसे स्वतंत्रता सेनानी बरकतुल्ला के योगदान का अपमान बताया।
गौरतलब है कि 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतुल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था, जो स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद बरकतुल्ला भोपाली के सम्मान में किया गया था। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे।
Author: JAN TV Editorial Team
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