कंधमाल जिला चाइल्ड हेल्पलाइन के सदस्य शिव शंकर बेहरा ने बताया कि 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा ने पहले अपने माता-पिता को समझाने की कोशिश की कि वह अभी पढ़ाई करना चाहती है और शादी नहीं करना चाहती। लेकिन परिवार के लोग उसकी बात मानने को तैयार नहीं हुए और शादी की तैयारियां जारी रखीं।
परिस्थिति से परेशान होकर छात्रा अपने बुआ के घर चली गई, लेकिन वहां भी उस पर शादी के लिए दबाव बनाया जाने लगा। उसके माता-पिता चाहते थे कि वह वापस गांव लौट आए ताकि तय शादी कराई जा सके।
जब छात्रा को लगा कि उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है, तो उसने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल कर तत्काल सुरक्षा की मांग की। शिकायत मिलते ही जिला चाइल्ड हेल्पलाइन ने सारंगगढ़ पुलिस स्टेशन से संपर्क किया। पुलिस की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छात्रा को उसकी बुआ के घर से सुरक्षित बाहर निकाला।
इसके बाद छात्रा को पहले स्थानीय वन-स्टॉप सेंटर में सुरक्षित आश्रय और काउंसलिंग के लिए भेजा गया। बाद में उसे आगे की कानूनी और संरक्षण संबंधी प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के सुपुर्द कर दिया गया।
शिव शंकर बेहरा ने बताया कि छात्रा पढ़ाई में होनहार है और अपनी शिक्षा जारी रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में साहस दिखाकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना सराहनीय है। उन्होंने छात्रा की जागरूकता और हिम्मत की प्रशंसा करते हुए कहा कि उसकी सूझबूझ के कारण एक संभावित बाल विवाह को समय रहते रोका जा सका।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि जागरूकता, हेल्पलाइन सेवाएं और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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