बचाव दल मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। घटनास्थल पर विशेष कैमरे लगाए गए हैं, वहीं जिन लोगों के मोबाइल फोन अब भी मलबे के नीचे सक्रिय हैं, उनकी लोकेशन का पता लगाने के लिए मोबाइल टावर डेटा की भी मदद ली जा रही है।
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री डॉ. इंद्रनील खान ने बताया कि बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सेना, कोलकाता नगर निगम, कोलकाता पुलिस और राज्य व केंद्र सरकार की अन्य एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन में नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित जीवित व्यक्ति तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, बड़े पैमाने पर मलबा हटाने का काम तभी शुरू किया जाएगा जब बचाव दल पूरी तरह संतुष्ट हो जाएगा कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति जीवित नहीं फंसा है। फिलहाल प्राथमिकता हर संभावित जीवन को सुरक्षित निकालने की है।
यह हादसा 24 जून की दोपहर को कोलकाता में एक निर्माणाधीन गोदाम की इमारत ढहने से हुआ था। घटना के बाद से लगातार राहत और बचाव अभियान जारी है और कई एजेंसियां मौके पर तैनात हैं।
उधर, इमारत ढहने के कारणों की जांच के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि हादसा निर्माण संबंधी लापरवाही, तकनीकी खामी या किसी अन्य वजह से हुआ।
Author: JAN TV Editorial Team
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